क्या था PCTV Bill? कांग्रेस का वह विवादित कानून, जिसे BJP ने बताया था ‘एकतरफा’ और जो कभी कानून नहीं बन सका
साल 2011 में यूपीए सरकार एक ऐसा विधेयक लेकर आई, जिसने संसद से लेकर देशभर में तीखी राजनीतिक बहस छेड़ दी। इसका नाम था Prevention of Communal and Targeted Violence (Access to Justice and Reparations) Bill, जिसे संक्षेप में PCTV Bill कहा गया। सरकार का कहना था कि इसका उद्देश्य सांप्रदायिक हिंसा के पीड़ितों को बेहतर सुरक्षा और न्याय दिलाना है। लेकिन विपक्ष और कई सामाजिक संगठनों ने इसे एकतरफा और संविधान की भावना के खिलाफ बताया।
क्या था इस बिल का उद्देश्य?
इस विधेयक का मसौदा नेशनल एडवाइजरी काउंसिल (NAC) की सिफारिशों के आधार पर तैयार किया गया था। बिल का उद्देश्य सांप्रदायिक हिंसा की स्थिति में पीड़ितों को राहत, पुनर्वास और न्याय सुनिश्चित करना था। इसमें सरकारी अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और पीड़ितों के अधिकारों को मजबूत करने का भी प्रस्ताव था।
विवाद क्यों हुआ?
विवाद की सबसे बड़ी वजह बिल में प्रयुक्त “ग्रुप” और “विक्टिम” की परिभाषा थी। आलोचकों का कहना था कि बिल मुख्य रूप से धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों तथा अनुसूचित जाति-जनजाति समुदायों को सुरक्षा देता है, जबकि बहुसंख्यक समुदाय के लोगों को उसी प्रकार का कानूनी संरक्षण नहीं देता। भारतीय जनता पार्टी, कई संवैधानिक विशेषज्ञों और विभिन्न संगठनों ने आरोप लगाया कि यदि यह कानून लागू होता, तो सांप्रदायिक मामलों में जांच और अभियोजन की प्रक्रिया पक्षपातपूर्ण हो सकती थी। हालांकि, बिल के समर्थकों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य केवल उन समुदायों की रक्षा करना था जो सांप्रदायिक हिंसा में अधिक संवेदनशील माने जाते हैं।
राजनीतिक विरोध और क्या हुआ आगे?
PCTV Bill का संसद के भीतर और बाहर व्यापक विरोध हुआ। भाजपा सहित कई विपक्षी दलों ने इसे संघीय ढांचे और समान नागरिक अधिकारों के सिद्धांत के विपरीत बताया। लगातार विरोध और राजनीतिक सहमति न बनने के कारण यह विधेयक कभी संसद में पारित नहीं हो सका और अंततः कानून नहीं बन पाया।
आज भी क्यों होती है इस बिल की चर्चा?
PCTV Bill आज भी भारतीय राजनीति में एक विवादित उदाहरण के रूप में याद किया जाता है। समर्थकों का मानना है कि यह सांप्रदायिक हिंसा के पीड़ितों को न्याय दिलाने का प्रयास था, जबकि विरोधियों के अनुसार यह कानून समानता के संवैधानिक सिद्धांत से समझौता करता था। यही कारण है कि वर्षों बाद भी यह विधेयक राजनीतिक और वैचारिक बहस का हिस्सा बना हुआ है।
2014 के आम चुनावों में भी कांग्रेस की कथित तुष्टिकरण की राजनीति और PCTV Bill जैसे मुद्दों का उल्लेख भाजपा के नेताओं द्वारा चुनावी अभियानों में किया गया। हालांकि, यह कहना कि केवल इसी विधेयक के कारण चुनावी परिणाम प्रभावित हुए, उपलब्ध ऐतिहासिक साक्ष्यों से सिद्ध नहीं होता।
