अभिषेक बनर्जी के मेडिकल सर्टिफिकेट पर उठे सवाल, विदेश इलाज की याचिका खारिज होने के बाद बढ़ा विवाद

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पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद अभिषेक बनर्जी एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार विवाद उनके विदेश में इलाज के लिए दायर की गई याचिका और कथित मेडिकल दस्तावेजों को लेकर है। सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं, जबकि इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।

विदेश में इलाज की अनुमति नहीं मिली

‘डीजे तो बजेगा’ टिप्पणी से जुड़े मामले में कानूनी कार्यवाही का सामना कर रहे अभिषेक बनर्जी ने आंखों के इलाज के लिए अमेरिका जाने की अनुमति मांगी थी। इस संबंध में उन्होंने कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि भारत में भी आंखों के इलाज की पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसके बाद अदालत ने विदेश जाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया।

मेडिकल सर्टिफिकेट को लेकर नया विवाद

विदेश यात्रा की अनुमति न मिलने के बाद सोशल मीडिया पर यह दावा किया जाने लगा कि अभिषेक बनर्जी द्वारा अदालत में जमा किया गया मेडिकल सर्टिफिकेट कथित रूप से फर्जी था। कुछ सोशल मीडिया पोस्ट्स में यह आरोप लगाया गया कि मेडिकल काउंसिल ने दस्तावेजों में गड़बड़ी की बात कही है।

हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इस विषय पर संबंधित जांच अथवा न्यायिक प्रक्रिया के अंतिम निष्कर्ष का इंतजार है।

भाजपा नेताओं ने उठाए सवाल

मामले को लेकर भाजपा नेता दिलीप घोष ने अभिषेक बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट का इस्तेमाल किया गया है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और सच्चाई सामने आनी चाहिए।

क्या है ‘डीजे तो बजेगा’ मामला?

यह मामला पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए अभिषेक बनर्जी के एक भाषण से जुड़ा है। चुनावी सभा में उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा था कि “चार मई की रात के बाद डीजे तो बजेगा, इतना जोर से बजेगा कि कान झनझना जाएंगे।”

इस बयान को कथित रूप से भड़काऊ बताते हुए बागुईआटी निवासी ने विधाननगर साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। बाद में मामले की जांच सीआईडी को सौंप दी गई।

इसी मामले की सुनवाई के दौरान अभिषेक बनर्जी के वकील ने आंखों के इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति मांगी थी, जिसे कलकत्ता हाईकोर्ट की एकल पीठ ने अस्वीकार कर दिया।

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