ट्रंप का ‘टैरिफ बम’: चीन, ब्रिटेन और इजरायल पर चाबुक, भारत को क्यों मिली राहत?
नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक फैसले से आधी रात को पूरी दुनिया के व्यापार और वैश्विक बाजार में हड़कंप मच गया है। ट्रंप प्रशासन ने करीब 60 व्यापारिक साझेदारों पर नया ‘टैरिफ बम’ फोड़ दिया है। चौंकाने वाली बात यह है कि अमेरिका ने इस बार अपने सबसे करीबी रणनीतिक सहयोगी इजरायल को भी नहीं बख्शा है, जिस पर 12.5% का भारी शुल्क लगाया गया है।
हालाँकि, इस वैश्विक आर्थिक उथल-पुथल के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। जहाँ चीन, जापान और ब्रिटेन जैसे विकसित देशों पर कड़ा रुख अपनाया गया है, वहीं भारत पर लगने वाले टैरिफ को घटाकर 10% कर दिया गया है।
किस कानून के तहत लिया गया फैसला?
अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, यह सख्त कदम ‘जबरन मजदूरी’ (Forced Labor) को रोकने और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए उठाया गया है। अमेरिकी ट्रेड एक्ट 1974 के सेक्शन 301 (Section 301 of the US Trade Act, 1974) का हवाला देते हुए ट्रंप ने स्पष्ट किया कि श्रम कानूनों और लेबर प्रैक्टिसेज की अनदेखी करने वाले देशों पर कोई रहम नहीं बर्दाश्त किया जाएगा।
इजरायल, चीन और ब्रिटेन को बड़ा झटका
इस फैसले में सबसे हैरान करने वाला पहलू अमेरिका और इजरायल के रिश्तों से जुड़ा है। एक तरफ जहाँ अमेरिका और इजरायल ईरान के खिलाफ एकजुट होकर जंग में खड़े हैं, वहीं व्यापारिक मोर्चे पर ट्रंप ने इजरायल पर 12.5% का शुल्क ठोक दिया है।
इसके अलावा, चीन, ब्रिटेन और जापान जैसे देशों पर भी 12.5% का टैरिफ लगाया गया है। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि इन देशों के पास जबरन मजदूरी रोकने और श्रम मानकों को लागू करने के लिए पर्याप्त कड़े कानून नहीं हैं।
आखिर भारत पर क्यों मेहरबान हुए ट्रंप?
शुरुआती योजना के मुताबिक, अमेरिका भारत पर भी 12.5% का टैरिफ लगाने की तैयारी में था। लेकिन अंतिम समय में भारत को राहत देते हुए इसे घटाकर 10% कर दिया गया।
व्हाइट हाउस द्वारा जारी जानकारी के अनुसार:
- भारत, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे देशों ने जबरन मजदूरी पर रोक लगाने के लिए ठोस प्रतिबद्धता (Solid Commitment) जताई है।
- भारत ने अपने लेबर प्रैक्टिसेज और नियमों में सुधार की दिशा में सकारात्मक कदम उठाए हैं।
- भारत और अमेरिका के बीच हुई सकारात्मक और कूटनीतिक बातचीत के कारण यह दर कम की गई।
निष्कर्ष
जहाँ एक तरफ चीन, ब्रिटेन और इजरायल जैसे प्रमुख आर्थिक देश ट्रंप की नई संरक्षणवादी नीति से बड़े नुकसान की ओर धकेले गए हैं, वहीं भारत ने अपनी समझदारी, कूटनीतिक बातचीत और वैश्विक प्रतिबद्धताओं के दम पर खुद को एक बड़े आर्थिक नुकसान से बचा लिया है।
