क्या बरुण बिस्वास हत्याकांड में बढ़ीं ममता बनर्जी की मुश्किलें? 14 साल पुराने मामले में नई शिकायत से फिर गरमाई राजनीति
पश्चिम बंगाल के चर्चित बरुण बिस्वास हत्याकांड ने एक बार फिर राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। करीब 14 साल पुराने इस मामले में अब पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का नाम कथित साजिशकर्ता के तौर पर एक नई शिकायत में शामिल किए जाने के बाद बहस तेज हो गई है। हालांकि अभी तक यह केवल एक शिकायत है, जिस पर जांच की प्रक्रिया शुरू होनी है और अदालत ने ममता बनर्जी के खिलाफ किसी तरह का दोष तय नहीं किया है।
क्या है पूरा मामला?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बरुण बिस्वास के सहयोगी रहे नंददुलाल दास ने बांगांव के पुलिस अधीक्षक को शिकायत देकर मांग की है कि उनकी शिकायत को एफआईआर माना जाए और पूरे मामले की नए सिरे से जांच कराई जाए।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 2012 में हुई बरुण बिस्वास की हत्या की निष्पक्ष जांच नहीं हुई और असली आरोपियों तक जांच पहुंचने नहीं दी गई। शिकायत में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पूर्व मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक का भी कथित रूप से उल्लेख किया गया है।
शिकायतकर्ता ने क्या आरोप लगाए?
नंददुलाल दास का आरोप है कि हत्या की जांच प्रभावित हुई और वास्तविक आरोपियों को बचाने की कोशिश की गई। उन्होंने मांग की है कि मामले की दोबारा जांच कर दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
हालांकि, ये आरोप शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए हैं और इनकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
दोबारा क्यों खुला मामला?
राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद बरुण बिस्वास की बहन प्रमिला बिस्वास और उनके परिवार ने मामले की दोबारा जांच की मांग की थी। इसके बाद सीआईडी ने जांच शुरू की।
बांगांव अदालत में मामले की नई सुनवाई भी शुरू हो चुकी है। विशेष लोक अभियोजक की नियुक्ति के बाद एक गवाह का बयान दर्ज किया जा चुका है। अब 31 अगस्त को बरुण बिस्वास के पिता की गवाही प्रस्तावित है।
परिवार की प्रतिक्रिया
बरुण बिस्वास की बहन प्रमिला बिस्वास ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को शिकायत करने का अधिकार है और नंददुलाल दास ने कानूनी प्रक्रिया अपनाई है। उन्होंने कहा कि शिकायत की जांच कानून के अनुसार होनी चाहिए।
टीएमसी ने आरोपों को किया खारिज
तृणमूल कांग्रेस की ओर से पार्टी प्रवक्ता कुणाल घोष ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि ममता बनर्जी का इस घटना से कोई संबंध नहीं है और यह मामला राजनीतिक उद्देश्य से उठाया जा रहा है।
पुलिस ने क्या कहा?
बांगांव की पुलिस अधीक्षक बिदिशा कलिता दासगुप्ता ने बताया कि शिकायत प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों की जांच के बाद कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
कौन थे बरुण बिस्वास?
बरुण बिस्वास कोलकाता के मित्रा इंस्टीट्यूशन में बंगाली के शिक्षक थे और उत्तर 24 परगना जिले के पंचपोटा गांव के निवासी थे।
उन्होंने महिलाओं के खिलाफ अपराध और स्थानीय स्तर पर कथित अन्याय के विरोध में ‘सुतिया प्रतिवादी मंच’ नामक संगठन बनाया था। वे विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय रहते थे और स्थानीय स्तर पर कथित भ्रष्टाचार व सरकारी धन के दुरुपयोग के खिलाफ भी आवाज उठाते थे।
कैसे हुई थी हत्या?
5 जुलाई 2012 को बरुण बिस्वास गोबरडांगा रेलवे स्टेशन पर ट्रेन से उतरने के बाद मोटरसाइकिल पर बैठ रहे थे। इसी दौरान अज्ञात हमलावरों ने उन पर गोली चला दी, जिससे उनकी मौत हो गई।
हत्या के बाद परिवार ने तत्कालीन तृणमूल नेता और पूर्व मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक पर भी साजिश का आरोप लगाया था। परिवार का कहना है कि इतने वर्षों बाद भी उन्हें न्याय नहीं मिला और मामले की पूरी सच्चाई सामने आना बाकी है।
