राजभर का बड़ा हमला! सपा सरकार के पुराने मामलों को लेकर फिर गरमाई यूपी की सियासत

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“उत्तर प्रदेश की राजनीति में ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव पर एक बार फिर बड़ा हमला बोला है। इस बार उन्होंने सीधे सपा सरकार के कार्यकाल में दलितों के खिलाफ हुई घटनाओं का मुद्दा उठाया है और कहा है कि जनता को उस दौर को भूलना नहीं चाहिए।”

ओम प्रकाश राजभर के इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। खास बात यह है कि यह हमला ऐसे समय आया है, जब समाजवादी पार्टी लगातार PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की राजनीति को अपना सबसे बड़ा चुनावी एजेंडा बता रही है। ऐसे में राजभर के आरोपों ने सपा के इसी दावे पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट साझा करते हुए समाजवादी पार्टी के शासनकाल पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि सपा सरकार के दौरान दलितों और पिछड़े वर्गों के खिलाफ कई गंभीर घटनाएं हुई थीं और अब वे ऐसी घटनाओं को एक-एक करके जनता के सामने लाएंगे।

राजभर ने अपने पोस्ट को “सपा का आतंकराज – पार्ट 1” शीर्षक दिया। इसके साथ उन्होंने समाजवादी पार्टी के कार्यकाल की कई घटनाओं का जिक्र किया।

राजभर ने दावा किया कि 6 मार्च 2012 को विधानसभा चुनाव का परिणाम आने के बाद, सरकार के औपचारिक गठन से पहले ही सपा कार्यकर्ताओं द्वारा दलितों और पिछड़े वर्गों के खिलाफ हिंसा और दबाव की घटनाएं शुरू हो गई थीं।

इसके बाद उन्होंने सीतापुर जिले के रेवसा क्षेत्र के बिंबिया गांव की घटना का उल्लेख किया। राजभर का आरोप है कि 8 मार्च 2012 को दलितों के 13 घरों में आग लगा दी गई थी। उन्होंने दावा किया कि ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि दलितों ने समाजवादी पार्टी को वोट नहीं दिया था।

राजभर ने 21 दिसंबर 2015 की एक अन्य घटना का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, सीतापुर के लहरपुर थाना क्षेत्र के पट्टी देहलिया गांव में दलित बस्ती के 35 घरों को आग के हवाले कर दिया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि ग्राम प्रधान चुनाव में सपा समर्थित उम्मीदवार को वोट न देने की वजह से यह घटना हुई।

अपने पोस्ट में राजभर ने यह भी कहा कि आने वाले दिनों में वे उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों की ऐसी घटनाओं को सार्वजनिक करेंगे, ताकि जनता समाजवादी पार्टी के शासनकाल को याद रख सके।

राजभर का यह बयान ऐसे समय आया है, जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं। कानून-व्यवस्था, दलित राजनीति और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दे एक बार फिर चुनावी विमर्श के केंद्र में आते दिखाई दे रहे हैं।

हालांकि, समाजवादी पार्टी की ओर से राजभर के इन नए आरोपों पर फिलहाल कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इससे पहले भी पार्टी ऐसे आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी बताती रही है।

अब सवाल यही है कि क्या ओम प्रकाश राजभर द्वारा उठाए जा रहे पुराने मामलों पर आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस और तेज होगी? क्या समाजवादी पार्टी इन आरोपों का विस्तार से जवाब देगी? और क्या 2027 के विधानसभा चुनाव में अतीत की घटनाएं फिर से बड़ा चुनावी मुद्दा बनेंगी?

फिलहाल इतना तय है कि राजभर के इस बयान ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नई बहस जरूर छेड़ दी है।

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