बंगाल में ‘लव जिहाद’ की साजिश नाकाम: हिंदू नाम रख नाबालिग को भगा रहे रिजौल खान को जनता ने सिखाया सबक; बंगाल में कट्टरपंथ पर बड़ा प्रहार
पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन के बाद से ही राज्य में वर्षों से जड़े जमाए कट्टरपंथ की परतें एक-एक करके खुलती जा रही हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के दौर में जहां कई इलाकों से जिहादी तत्वों द्वारा अपना नाम बदलकर और धार्मिक पहचान छिपाकर हिंदू लड़कियों को अपने जाल में फंसाने की खबरें आती थीं, अब वैसी ताकतों का इलाज शुरू हो चुका है। बंगाल में हुए बड़े राजनीतिक बदलाव के बाद आम नागरिक खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं और सड़कों पर उतरकर इन तत्वों को कड़ा सबक सिखा रहे हैं। ऐसा ही एक हालिया और सनसनीखेज मामला पश्चिम बंगाल के बंगांव से सामने आया है, जहां लव जिहाद के एक घिनौने प्रयास को स्थानीय लोगों की सतर्कता ने नाकाम कर दिया।
पहचान छिपाकर 15 साल की नाबालिग को ले जा रहा था रिजौल खान
मिली जानकारी के अनुसार, बंगांव के चंदपारा इलाके में एक संदिग्ध युवक को स्थानीय लोगों ने पकड़ा है, जिसकी पहचान रिजौल खान के रूप में हुई है। आरोपी रिजौल मूल रूप से मुर्शिदाबाद का रहने वाला है। आरोप है कि उसने बंगांव इलाके में अपनी असली धार्मिक पहचान छिपाई और एक हिंदू नाम का मुखौटा ओढ़कर चंदपारा की रहने वाली महज 15 साल की एक मासूम नाबालिग हिंदू लड़की को अपने जाल में फंसा लिया। यह जिहादी उस नाबालिग बच्ची को बहला-फुसलाकर भगाने की फिराक में था। हालांकि, स्थानीय लोगों ने उसकी संदिग्ध गतिविधियों और साजिश को समय रहते भांप लिया और उसे बच्ची के साथ रंगे हाथों दबोच लिया।
सड़कों पर फूटा जनता का गुस्सा
स्थानीय लोगों द्वारा पकड़े जाने के बाद रिजौल खान की सारी हेकड़ी और चालाकी धरी की धरी रह गई। पहले जो लोग सोचते थे कि सरकार और प्रशासन के कथित संरक्षण के भरोसे वे कुछ भी कर गुजरेंगे, उन्हें बंगांव की जनता ने सीधा और कड़ा संदेश दे दिया है। सड़कों पर सरेआम इस आरोपी को वो सबक सिखाया गया, जिसे लोग आने वाले समय में ऐसी घिनौनी मानसिकता रखने वालों के लिए एक खौफनाक नजीर मान रहे हैं। सालों से जो गुस्सा बंगाल की हिंदू जनता के दिलों में सुलग रहा था, वह अब इन अपराधियों पर खुलकर फूट रहा है। अपनी पहचान छिपाकर घिनौना खेल खेलने वालों के दिन अब पूरी तरह लद चुके हैं।
तुष्टिकरण का ‘काला चिट्ठा’
टीएमसी (TMC) की पिछली सरकार के दौरान बंगाल में इस तरह की खबरें आम हो गई थीं। आरोप है कि तत्कालीन प्रशासन वोट बैंक की राजनीति के चलते इन मामलों पर आंखें मूंदे बैठा था, जिससे अपराधियों और जिहादी तत्वों के हौसले बुलंद थे। तुष्टिकरण की पराकाष्ठा के कारण कानून का खौफ पूरी तरह खत्म हो चुका था और हिंदू बहन-बेटियों की सुरक्षा भगवान भरोसे थी। लेकिन, बंगाल के लोगों ने इस घोर अन्याय को और सहने से साफ इनकार कर दिया और 15 साल के उस दमनकारी शासन को उखाड़ फेंका।
गुंडागर्दी और सिंडिकेट राज पर कड़ा प्रहार
आज जो बदलाव देखने को मिल रहा है, वह इसी जन-आक्रोश का नतीजा है। आज जनता सरेआम टीएमसी के उन गुंडों और माफियाओं पर आक्रामक है जिन्होंने सालों तक बंगाल को अपनी बपौती समझकर लूटा। जब ये पुलिस की गिरफ्त में आते हैं, तो लोग इन पर अंडे फेंककर अपना गुस्सा निकाल रहे हैं। ममता बनर्जी के कई भ्रष्ट करीबी अब सलाखों के पीछे पहुंच चुके हैं। हफ्ता वसूली, सिंडिकेट राज और गुंडागर्दी का वो साम्राज्य अब ताश के पत्तों की तरह ढह रहा है।
रिजौल खान के साथ बंगांव में जो हुआ, उसने पूरे बंगाल को साफ संदेश दे दिया है कि अब बंगाल की पावन धरती पर लव जिहाद, उपद्रव, हफ्ता वसूली या महिलाओं के साथ बदसलूकी को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कानून तो अपना काम सख्ती से करेगा ही, लेकिन अगर कोई इससे बचने की कोशिश करेगा, तो आम जनता भी उसे सड़क पर सबक सिखाने के लिए पूरी तरह तैयार है। अपराधियों के मन में यह खौफ होना बेहद जरूरी था, और वो खौफ अब बंगाल की सड़कों पर साफ दिखाई दे रहा है।
