ऑपरेशन सिंदूर के शहीदों के नाम पर विवाद: पवन खेड़ा के आरोप पर सरकार का जवाब, क्या है पूरा मामला?
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शहीद हुए छह भारतीय सैनिकों के नामों को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने एक साल तक शहीदों की पहचान देश से छिपाकर रखी। वहीं केंद्र सरकार ने इस आरोप को भ्रामक बताते हुए कहा कि इन सैनिकों की शहादत पहले भी सार्वजनिक रूप से स्वीकार की जा चुकी थी।
क्या कहा था पवन खेड़ा ने?
पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर में शहीद हुए जवानों को वह सम्मान नहीं दिया, जिसके वे हकदार थे। उनका आरोप था कि सरकार ने एक वर्ष तक उनके नाम सार्वजनिक नहीं किए।
सरकार ने क्या जवाब दिया?
सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि 26 जून 2026 को केवल इन छह वीर सैनिकों के नाम राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की Roll of Honour में औपचारिक रूप से जोड़े गए थे। इसका अर्थ यह नहीं है कि उनकी शहादत पहली बार स्वीकार की गई।
सरकार के अनुसार, इन सैनिकों के बारे में भारतीय सेना की विभिन्न इकाइयों, व्हाइट नाइट कॉर्प्स और सैन्य अधिकारियों द्वारा समय-समय पर श्रद्धांजलि दी गई थी। कई मामलों में सोशल मीडिया पोस्ट, सैन्य बयान और प्रेस ब्रीफिंग के माध्यम से उनके सर्वोच्च बलिदान का उल्लेख पहले ही किया जा चुका था।
ये हैं छह शहीद
- सार्जेंट सुरेंद्र कुमार (भारतीय वायु सेना)
- सूबेदार मेजर पवन कुमार
- हवलदार सुनील कुमार सिंह
- राइफलमैन सुनील कुमार (वीर चक्र)
- अग्निवीर मूड मुरलीनायक
- लांस नायक दिनेश कुमार
इन सभी के नाम अब राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की Roll of Honour में स्थायी रूप से दर्ज किए जा चुके हैं।
विवाद की वजह क्या बनी?
26 जून को कई मीडिया रिपोर्टों में यह प्रकाशित हुआ कि सरकार ने पहली बार इन छह सैनिकों के नाम सार्वजनिक किए हैं। इसके बाद सरकार ने स्पष्टीकरण जारी कर कहा कि यह प्रस्तुति सही नहीं है। सरकार का कहना है कि सैनिकों की शहादत पहले भी सार्वजनिक रिकॉर्ड और सैन्य श्रद्धांजलियों का हिस्सा रही है, जबकि 26 जून को केवल उन्हें राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर औपचारिक स्थान दिया गया।
