देवभूमि में कट्टरपंथ पर सबसे बड़ा प्रहार: 1 जुलाई से उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड का अस्तित्व खत्म, धामी सरकार का ऐतिहासिक फैसला
Madarasa Board: उत्तराखंड की धामी सरकार ने देवभूमि में कट्टरपंथी और विभाजनकारी मानसिकता पर रोक लगाने के लिए एक ऐसा ऐतिहासिक और कड़ा फैसला लिया है, जो कुछ ही दिनों में पूरे प्रदेश में लागू होने जा रहा है। आगामी 1 जुलाई से ‘उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड’ का अस्तित्व हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगा। धामी सरकार के इस कदम को देश की शिक्षा व्यवस्था में एक बहुत बड़े प्रयोग के तौर पर देखा जा रहा है। जानकारों का मानना है कि अगर यह प्रयोग सफल रहता है, तो मजहबी जहालत को कम करने और युवाओं में राष्ट्रीयता की भावना स्थापित करने के लिए इस व्यवस्था को पूरे देश में लागू किया जा सकता है।
30 जून के बाद खत्म हो जाएगा मदरसा बोर्ड
उत्तराखंड में मदरसा शिक्षा व्यवस्था इस समय एक ऐतिहासिक बदलाव के दौर से गुजर रही है। राज्य में 30 जून के बाद मदरसा बोर्ड पूरी तरह निष्प्रभावी हो जाएगा। 1 जुलाई से प्रदेश के सभी मदरसों की निगरानी, मान्यता, पाठ्यक्रम (Syllabus) और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की पूरी जिम्मेदारी ‘राज्य अल्पसंख्यक शिक्षण प्राधिकरण’ के हाथों में सौंप दी जाएगी।
सरकार का साफ मानना है कि यह बदलाव समान शिक्षा व्यवस्था (Uniform Education) को लागू करने और समाज के हर वर्ग को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित होगा।
सीएम धामी की दोटूक- देवभूमि में नहीं पनपेगी ‘कबिलाई अलगाववाद’ की मानसिकता
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस कड़े फैसले से स्पष्ट कर दिया है कि वह देवभूमि की अस्मिता और इसकी पवित्रता से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेंगे। उनका साफ संदेश है कि अब मदरसों को केवल और केवल धार्मिक शिक्षा तक सीमित रखने की छूट नहीं दी जा सकती।
मुख्यमंत्री धामी ने चेतावनी भरे लहजे में कहा:
“देवभूमि में विभाजनकारी तत्वों पर अंकुश लगाने के लिए ही मदरसा बोर्ड को पूरी तरह से खत्म करने का यह बड़ा फैसला लिया गया है। अब प्रदेश में किसी भी कीमत पर ‘कबिलाई अलगाववाद’ की मानसिकता को पनपने नहीं दिया जाएगा।”
मदरसों में अब लागू होगा NCERT सिलेबस
धामी सरकार का यह कदम उन ताकतों के मुंह पर एक करारा तमाचा माना जा रहा है, जो देश के भीतर एक समानांतर या अलग सिस्टम चलाने का ख्वाब देख रही थीं। अब देवभूमि के शैक्षणिक संस्थानों में सिर्फ और सिर्फ देशहित, राष्ट्रीयता और आधुनिक ज्ञान की बात होगी।
नए नियमों के मुताबिक, अब उत्तराखंड के मदरसों में पारंपरिक मजहबी शिक्षा के स्थान पर NCERT सिलेबस अनिवार्य रूप से लागू किया जाएगा। इसके तहत छात्रों को आधुनिक विषय पढ़ाए जाएंगे, जिससे धर्म विशेष के बच्चे भी साइंस, मैथ्स और कंप्यूटर जैसी मॉडर्न जानकारी हासिल कर अपनी लाइफ को बेहतर बना सकेंगे।
कागजी मदरसों और भ्रष्टाचार पर लगेगा ताला
वर्तमान में उत्तराखंड में लगभग 452 पंजीकृत (Registered) मदरसे संचालित हैं। सरकार के इस फैसले से न केवल मजहबी कट्टरता पर लगाम लगेगी, बल्कि मदरसों के नाम पर होने वाले भारी भ्रष्टाचार का भी पर्दाफाश होगा। गौरतलब है कि बीते दिनों उत्तराखंड में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया था, जहां सिर्फ कागजों पर बच्चों की संख्या अधिक दिखाकर सरकारी ग्रांट और फंड का दुरुपयोग किया जा रहा था, जबकि धरातल पर हकीकत बिल्कुल अलग थी। इस नए फैसले से ऐसे फर्जीवाड़े पर हमेशा के लिए रोक लग जाएगी।
गैर-पंजीकृतमदरसों पर सस्पेंस बरकरार
मदरसा बोर्ड के समाप्त होने के बाद अब सभी 452 पंजीकृत संस्थानों को ‘राज्य अल्पसंख्यक शिक्षण प्राधिकरण’ के अधीन आकर सरकारी नियमों के मुताबिक ही संचालन करना होगा। लेकिन इस बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि 1 जुलाई के बाद राज्य में चल रहे अवैध या नॉन-रजिस्टर्ड मदरसों का क्या होगा? प्रशासन इस पर भी पैनी नजर बनाए हुए है।
