‘BJP नेता सड़क पर नहीं निकल पाएंगे…’ पवन खेड़ा के विवादित बयान पर मचा बवाल, लोगों को याद आई इमरजेंसी
Pawan Khera on BJP leaders: एक तरफ जहाँ कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी अपनी भारत जोड़ो यात्रा के समय से ही ‘मोहब्बत की दुकान’ खोलने का दावा करते आ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उनकी ही पार्टी के बड़े नेताओं के बयान इस दावे पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। ताजा मामला कांग्रेस के नवनिर्वाचित राज्यसभा सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा का है, जिनका एक विवादित बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में भारी आक्रोश है और विपक्ष लगातार कांग्रेस को आड़े हाथों ले रहा है।
क्या है पवन खेड़ा का विवादित बयान?
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में पवन खेड़ा सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं को चेतावनी देते नजर आ रहे हैं। उन्होंने अहंकार भरे लहजे में कहा:
“हमारी सरकार आने दो, BJP नेता सड़क पर निकलने के काबिल नहीं होंगे। उन्हें सड़क पर निकलने के लिए भी सुरक्षा लेनी पड़ेगी।”
पवन खेड़ा के इस बयान को सिर्फ एक सामान्य राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि विपक्ष के खिलाफ एक सीधी धमकी और खुले खतरे के रूप में देखा जा रहा है। लोकतांत्रिक ढांचे में जहाँ संवाद और वैचारिक मतभेदों का सम्मान होना चाहिए, वहाँ देश की एक मुख्य राष्ट्रीय पार्टी के प्रवक्ता द्वारा ऐसी भाषा का इस्तेमाल लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा हमला माना जा रहा है।
इमरजेंसी और तानाशाही मानसिकता से तुलना
पवन खेड़ा के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने कांग्रेस पार्टी की मानसिकता को 1975 के आपातकाल (Emergency) से जोड़ना शुरू कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों और जनता का कहना है कि सत्ता में न होने के बावजूद अगर कांग्रेस नेताओं के तेवर ऐसे हैं, तो सत्ता में आने के बाद स्थिति क्या होगी?
साल 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने जिस तरह देश पर आपातकाल थोपकर पूरे विपक्ष को जेल की सलाखों के पीछे डाल दिया था और नागरिकों के अधिकार छीन लिए थे, आज ठीक वैसी ही तानाशाही सोच इस नए बयान में भी साफ झलकती है। आलोचकों का सवाल है कि क्या राजनीतिक विरोधियों को डराना-धमकाना और अपने कार्यकर्ताओं को हिंसा के लिए उकसाना ही कांग्रेस की नई राजनीति है?
पुरानी गलतियों से सबक नहीं ले रही कांग्रेस?
यह पहली बार नहीं है जब पवन खेड़ा अपने बयानों के कारण विवादों में घिरे हैं। इससे पहले असम विधानसभा चुनाव के दौरान भी उन्होंने असम के मुख्यमंत्री की पत्नी पर बेबुनियाद आरोप लगाए थे। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उस विवादित बयान का सीधा नुकसान कांग्रेस को उठाना पड़ा था और BJP को वहां बंपर जीत हासिल हुई थी।
लगातार मिल रही चुनावी हार के बावजूद कांग्रेस नेता अपनी भाषा की मर्यादा को सुधारने के लिए तैयार नहीं दिख रहे हैं। लोकतांत्रिक मर्यादा को भूलकर भय का माहौल बनाने की यह कोशिश कांग्रेस को जनता के विश्वास से और दूर कर सकती है।
क्या यह सब राहुल गांधी की शह पर हो रहा?
राजनीतिक गलियारों में अब सबसे बड़ा सवाल यही तैर रहा है कि एक तरफ ‘मोहब्बत की दुकान’ का नैरेटिव सेट किया जाता है और दूसरी तरफ उनके नेता ‘नफरत और धमकी का सामान’ बेच रहे हैं। आखिर कांग्रेस के नेता अपनी इन हरकतों से कब बाज आएंगे? और सबसे महत्वपूर्ण बात, क्या पवन खेड़ा जैसे नेताओं को ऐसा बेलगाम बयान देने की शह खुद राहुल गांधी से मिली हुई है?
