ममता बनर्जी को कलकत्ता हाईकोर्ट से बड़ा झटका, बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी विपक्ष के नेता बने रहेंगे !

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कलकत्ता हाई कोर्ट

पश्चिम बंगाल की राजनीति में जारी उठापटक के बीच ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस (TMC) को कलकत्ता हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने फिलहाल उस याचिका पर अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है, जिसमें बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष (LoP) बनाए जाने के फैसले को चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद ऋतब्रत बनर्जी फिलहाल विपक्ष के नेता के पद पर बने रहेंगे।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस के भीतर हुए राजनीतिक विभाजन के बाद ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दी गई थी। विधानसभा अध्यक्ष के इस फैसले को लेकर TMC ने आपत्ति जताई थी और मामला कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंच गया था।

याचिका में दावा किया गया था कि विपक्ष के नेता की नियुक्ति राजनीतिक दल द्वारा तय की जाती है और ऋतब्रत बनर्जी को यह पद देना नियमों के अनुरूप नहीं है। इसी आधार पर उनके नियुक्ति आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई थी।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

गुरुवार को मामले की सुनवाई के दौरान कलकत्ता हाईकोर्ट ने तत्काल हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। अदालत ने फिलहाल कोई अंतरिम राहत नहीं दी, जिससे विधानसभा अध्यक्ष द्वारा ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष के रूप में दी गई मान्यता प्रभावी बनी रहेगी।

अदालत में मामले की आगे भी सुनवाई होगी, लेकिन फिलहाल के लिए ऋतब्रत बनर्जी विपक्ष के नेता के पद पर बने रहेंगे।

TMC में गहराया अंदरूनी संकट

यह फैसला ऐसे समय आया है जब तृणमूल कांग्रेस पहले से ही आंतरिक मतभेदों का सामना कर रही है। जून की शुरुआत में पार्टी के भीतर बड़ा राजनीतिक विभाजन सामने आया था और बड़ी संख्या में विधायकों ने ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट का समर्थन किया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक 80 में से 58 विधायकों ने उनके पक्ष में समर्थन जताया था।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हाईकोर्ट का यह फैसला TMC नेतृत्व के लिए एक और चुनौती बन सकता है, क्योंकि इससे विधानसभा के भीतर ऋतब्रत बनर्जी की स्थिति फिलहाल मजबूत बनी हुई है।

पहले भी अदालत पहुंची थी TMC

इससे पहले TMC विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर ऋतब्रत बनर्जी की नियुक्ति को चुनौती दी थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने विधानसभा अध्यक्ष से नियुक्ति से जुड़े दस्तावेज और जवाब भी मांगा था।

पार्टी का तर्क था कि विपक्ष के नेता के लिए उसका अपना नाम प्रस्तावित था और विधानसभा अध्यक्ष ने उस प्रस्ताव की अनदेखी करते हुए ऋतब्रत बनर्जी को मान्यता दे दी।

बंगाल की राजनीति में बढ़ सकती है हलचल

हाईकोर्ट के फैसले के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। एक तरफ TMC इस फैसले के खिलाफ कानूनी लड़ाई जारी रखने की तैयारी में है, वहीं दूसरी ओर ऋतब्रत बनर्जी का गुट इसे अपनी बड़ी राजनीतिक जीत के रूप में देख रहा है।

फिलहाल अदालत की अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि यही तय करेगा कि पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता के पद को लेकर चल रहा विवाद आगे किस दिशा में जाएगा।

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