पंजाब की राजनीति में महा-भूचाल: अकाल तख्त ने CM भगवंत मान को घोषित किया ‘पंथ-विरोधी’, 29 जून को सभी सिख विधायक तलब
पंजाब की सियासत में इस वक्त एक अभूतपूर्व धार्मिक और राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक कथित वीडियो मामले में सिखों की सर्वोच्च धार्मिक पीठ, श्री अकाल तख्त साहिब ने बड़ा फैसला सुनाया है। अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को धार्मिक कदाचार का सीधा दोषी ठहराते हुए उन्हें ‘पंथ-विरोधी’ और ‘गुरु-विरोधी’ घोषित कर दिया है। इस फैसले के बाद राज्य के राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है और विपक्ष ने मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग तेज कर दी है।
क्या है पूरा मामला ?
पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री भगवंत मान का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा था, जिसने सिख समुदाय की भावनाओं को गहरे आहत किया है। वायरल वीडियो में मुख्यमंत्री को कथित तौर पर सिख गुरुओं के पूजनीय चित्रों पर शराब के छींटे मारते और पास की एक टेबल पर अमर्यादित कृत्य (पेशाब) करते हुए देखा गया।
शुरुआत में आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रवक्ताओं और समर्थकों ने इस वीडियो को पूरी तरह से फर्जी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI Generated) द्वारा तैयार किया गया बताया था। हालांकि, दो अलग-अलग मान्यता प्राप्त फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं (Forensic Labs) की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद यह दावा खारिज हो गया है। फॉरेंसिक जांच में पुष्टि की गई है कि वीडियो के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है और यह पूरी तरह से वास्तविक है।
अकाल तख्त का कड़ा रुख
फॉरेंसिक लैब की पुष्टि के बाद श्री अकाल तख्त साहिब ने मामले पर ऐतिहासिक संज्ञान लिया। जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को ‘गुरु दोखी’ (गुरु का विरोधी) करार देते हुए देश और विदेश में रहने वाले समस्त सिख समुदाय से उनके साथ सभी सामाजिक और धार्मिक संबंध तुरंत समाप्त करने की अपील की है।
इसके साथ ही अकाल तख्त ने एक बड़ा फरमान जारी करते हुए कहा है:
“पंजाब के जितने भी सिख विधायक हैं चाहे वे आम आदमी पार्टी के हों, कांग्रेस के हों या किसी भी अन्य राजनीतिक दल के और राज्य मंत्रिमंडल के जितने भी सदस्य हैं, उन सभी को आने वाली 29 जून को अकाल तख्त के साहिब के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा।”
चौतरफा घिरी आम आदमी पार्टी, विपक्ष ने मांगा इस्तीफा
इस फैसले के बाद आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पूरी तरह से चुप्पी साध ली है। वहीं, दूसरी ओर विपक्षी दलों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने इस घटना पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए भगवंत मान के सिख होने पर ही सवाल उठा दिए हैं और उनके तुरंत इस्तीफे की मांग की है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी इस मुद्दे पर आम आदमी पार्टी को कटघरे में खड़ा किया है। बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने दिल्ली से लेकर पंजाब तक ‘आप’ नेतृत्व को घेरते हुए कहा कि यह पहली बार नहीं है जब मुख्यमंत्री ने इस तरह की अमर्यादित हरकत की हो। उन्होंने पार्टी आलाकमान पर ऐसे गैर-जिम्मेदार व्यक्ति को सूबे की कमान सौंपने का आरोप लगाया।
राजनीतिक भविष्य पर संकट
इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल मुख्यमंत्री भगवंत मान के राजनीतिक भविष्य पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है, बल्कि आम आदमी पार्टी की साख को भी दांव पर लगा दिया है। देश-विदेश में हो रही किरकिरी के बीच अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि 29 जून की पेशी को लेकर आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल क्या रुख अपनाते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस पूरे विवाद का सीधा और गहरा असर पंजाब के आगामी चुनावों पर पड़ना तय है।
