महाराष्ट्र की राजनीति में फिर बड़ा भूचाल? उद्धव ठाकरे के सांसदों पर शिंदे गुट की नजर, ‘ऑपरेशन टाइगर’ से मची खलबली!

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मुंबई: महाराष्ट्र की सियासत से एक बार फिर बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद राज्य में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते दिख रहे हैं। महाविकास अघाड़ी (MVA) की बड़ी जीत और उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना (UBT) के शानदार प्रदर्शन के बीच, अब उनके ही सांसदों को लेकर कयासों का बाजार गर्म हो गया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने उद्धव गुट के नवनिर्वाचित सांसदों को अपने पाले में लाने के लिए एक सीक्रेट प्लान तैयार किया है, जिसे ‘ऑपरेशन टाइगर’ का नाम दिया जा रहा है।

क्या है ‘ऑपरेशन टाइगर’ और बगावत का दावा?

सूत्रों और राजनीतिक हलकों में चल रही चर्चाओं के मुताबिक, लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज करने वाले शिवसेना (UBT) के कुछ सांसद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के संपर्क में हैं। दावा किया जा रहा है कि केंद्र में एनडीए सरकार की मजबूती और राज्य के विकास कार्यों को गति देने के नाम पर इन सांसदों की ‘घर वापसी’ या पाला बदलने की तैयारी चल रही है। इसी संभावित टूट या रणनीति को राजनीतिक हल्कों में ‘ऑपरेशन टाइगर’ के रूप में देखा जा रहा है।

शिंदे गुट और उद्धव गुट की प्रतिक्रिया

इस पूरे घटनाक्रम पर महाराष्ट्र की राजनीति में बयानबाजी का दौर बेहद तीखा हो गया है:

  • शिंदे गुट का रुख: शिंदे गुट के नेताओं का दबी जुबान में कहना है कि उद्धव ठाकरे के साथ कई सांसद केवल टिकट की मजबूरी में थे, लेकिन अब वे विकास और असली शिवसेना की विचारधारा के साथ जुड़ना चाहते हैं।
  • उद्धव गुट (UBT) का पलटवार: दूसरी तरफ, उद्धव ठाकरे की पार्टी ने इन दावों को पूरी तरह से खारिज और भ्रामक बताया है। शिवसेना (UBT) के नेताओं का कहना है कि यह केवल महाविकास अघाड़ी की सफलता से घबराकर फैलाया जा रहा एक प्रोपगैंडा है। उनके सभी सांसद उद्धव ठाकरे के प्रति पूरी तरह वफादार हैं और किसी भी झांसे में नहीं आने वाले।

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले बड़ी मनोवैज्ञानिक जंग

विशेषज्ञों का मानना है कि साल के अंत में होने वाले महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से ठीक पहले यह दोनों गुटों के बीच एक बड़ी मनोवैज्ञानिक जंग (Psychological Warfare) है। अगर उद्धव गुट के सांसदों में जरा सी भी हलचल होती है, तो यह ठाकरे के लिए एक और बड़ा झटका हो सकता है। वहीं, अगर यह महज अफवाह साबित होती है, तो उद्धव गुट इसे अपनी नैतिक जीत के रूप में पेश करेगा। फिलहाल, ‘ऑपरेशन टाइगर’ की इन अटकलों ने मुंबई से लेकर दिल्ली तक का सियासी पारा हाई कर दिया है।

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