‘दिया तले अंधेरा’: राहुल गांधी के पसंदीदा CM पर ही लगा पीठ में खंजर घोंपने का आरोप, मीनाक्षी नटराजन के राज्यसभा टिकट कटने की इनसाइड स्टोरी
Meenakshi Natarajan Controversy: राजनीति के गलियारों में इस वक्त एक बेहद सनसनीखेज खबर तैर रही है, जिसने कांग्रेस के अंदरूनी घमासान और अंतर्विरोध को सरेआम बेनकाब कर दिया है। एक तरफ जहां कांग्रेस आलाकमान भारतीय जनता पार्टी (BJP) के खिलाफ देशव्यापी चक्रव्यूह रचने का दावा करता है, वहीं दूसरी तरफ पार्टी के भीतर बैठे उनके अपने ही क्षत्रप ऐसा खेल कर देते हैं कि पूरी रणनीति धड़ाम से जमीन पर आ गिरती है। ताजा मामला कांग्रेस की दिग्गज नेता और राहुल गांधी की बेहद करीबी मानी जाने वाली मीनाक्षी नटराजन की राज्यसभा उम्मीदवारी रद्द होने से जुड़ा है, जिसमें अब एक बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ आ गया है।
‘ Favorites ‘ के बीच हुआ बड़ा खेल
तेलंगाना के पूर्व मंत्री और भारत राष्ट्र समिति (BRS) के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामा राव (KTR) ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी पर एक ऐसा राजनीतिक बम फोड़ा है, जिससे कांग्रेस के भीतर हड़कंप मच गया है। केटीआर ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने तेलंगाना की कांग्रेस प्रभारी मीनाक्षी नटराजन की पीठ में छुरा घोंपने का काम किया है। केटीआर के अनुसार, मुख्यमंत्री की इसी धोखेबाजी और चालबाजी के चलते मध्य प्रदेश में मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा का नामांकन रद्द हुआ। खैराताबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए बीआरएस नेता ने मुख्यमंत्री पर घिनौनी और बदले की राजनीति करने का आरोप लगाया।
क्यों रची गई यह कथित साजिश?
इस पूरे विवाद के पीछे की जो इनसाइड स्टोरी सामने आ रही है, वह बेहद गंभीर है। केटीआर का दावा है कि:
- घोटालों की जानकारी लीक होना: मीनाक्षी नटराजन के पास तेलंगाना सरकार में हो रही वित्तीय अनियमितताओं और बड़े घोटालों की पक्की जानकारी थी, जिसे वह लगातार आलाकमान तक पहुंचा रही थीं।
- फर्जी केस का जाल: अपने काले कारनामों को उजागर होने से बचाने और नटराजन का मुंह बंद करने के लिए मुख्यमंत्री ने उनके खिलाफ तेलंगाना में एक फर्जी केस दर्ज करवा दिया।
- BJP से कथित सांठगांठ: आरोप है कि मुख्यमंत्री ने इस फर्जी केस की पूरी डिटेल और सीक्रेट कागजात खुद मध्य प्रदेश के बीजेपी नेताओं तक पहुंचाए, ताकि नटराजन को किसी भी कीमत पर राज्यसभा जाने से रोका जा सके।
मध्य प्रदेश का चुनावी गणित और कांग्रेस का डर
मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए नामांकन की प्रक्रिया चल रही थी। विधानसभा में विधायकों की संख्या बल के हिसाब से गणित बिल्कुल साफ था, बीजेपी दो सीटों पर आसानी से जीत रही थी, जबकि तीसरी सीट पर कांग्रेस की जीत सौ फीसदी पक्की थी। कांग्रेस ने इसी सुरक्षित सीट से मीनाक्षी नटराजन को अपना उम्मीदवार बनाकर मैदान में उतारा था।
लेकिन कहानी में ट्विस्ट तब आया जब बीजेपी ने संख्या बल न होने के बावजूद तीसरी सीट पर भी अपना प्रत्याशी उतार दिया। इससे कांग्रेस खेमे में खलबली मच गई। दिल्ली से लेकर भोपाल तक कांग्रेस के रणनीतिकार विधायकों को एकजुट रखने और क्रॉस वोटिंग से बचाने में दिन-रात एक कर रहे थे। लेकिन कांग्रेस जिसे बाहर का खतरा समझ रही थी, वह हमला असल में घर के अंदर से ही हो चुका था।
सुप्रीम कोर्ट से झटका
रिटर्निंग ऑफिसर ने कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र खारिज कर दिया। नामांकन रद्द होने की असली कानूनी वजह वही बनी, जिसका ताना-बाना तेलंगाना में बुना गया था। दरअसल, मीनाक्षी नटराजन ने अपने चुनावी हलफनामे में तेलंगाना में दर्ज उस आपराधिक मामले की जानकारी छिपा ली थी। नियमों के उल्लंघन के आधार पर उनका पर्चा खारिज कर दिया गया। इस झटके के बाद कांग्रेस ने तुरंत विक्टिम कार्ड खेलते हुए चुनाव आयोग से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक की चौखट खटखटाई। बीजेपी पर तमाम तरह के आरोप लगाए गए, लेकिन देश की सबसे बड़ी अदालत ने भी चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया और कांग्रेस की सारी कानूनी उम्मीदें ध्वस्त हो गईं।
क्या एक्शन ले पाएगा कांग्रेस आलाकमान?
इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि कांग्रेस के लिए इस बार ‘घर का भेदी ही लंका ढा गया’। राहुल गांधी की फेवरेट उम्मीदवार का पत्ता उनके ही सबसे भरोसेमंद और पसंदीदा मुख्यमंत्री ने साफ करवा दिया। अब देश की राजनीति का सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कांग्रेस नेतृत्व अपने इस रसूखदार मुख्यमंत्री के खिलाफ कोई सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की हिम्मत दिखा पाएगा, या फिर हर बार की तरह अपनी अंदरूनी नाकामी को छुपाने के लिए विपक्ष पर घटिया राजनीति का आरोप लगाता रहेगा?
