मेरठ में मिला जिहादी साइबर कैफ़े, लोगों के फर्जी आधार कार्ड बनाता था निजामुद्दीन
उत्तर प्रदेश के मेरठ में पुलिस ने एक ऐसे कथित साइबर और दस्तावेज़ धोखाधड़ी नेटवर्क का खुलासा किया है, जिसने जांच एजेंसियों को भी चौंका दिया है। पुलिस ने एक फर्जी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) या जनसेवा केंद्र का भंडाफोड़ करते हुए दो लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि यह केंद्र गरीब और जरूरतमंद लोगों के पहचान दस्तावेजों का दुरुपयोग कर फर्जी बैंक खाते खोलने और ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी में इस्तेमाल किया जा रहा था।
पिता-पुत्र गिरफ्तार
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान निजामुद्दीन और उसके बेटे अरकम के रूप में हुई है। दोनों मेरठ के अंसार कॉलोनी इलाके के निवासी बताए गए हैं। पुलिस का आरोप है कि दोनों मिलकर एक फर्जी जनसेवा केंद्र चला रहे थे और पहचान दस्तावेजों के आधार पर बैंकिंग और ऑनलाइन लेन-देन से जुड़े फर्जीवाड़े को अंजाम दे रहे थे।
कैसे काम करता था कथित नेटवर्क?
प्रारंभिक जांच के अनुसार आरोपी कथित तौर पर गरीब और जरूरतमंद लोगों के आधार कार्ड, वोटर आईडी और अन्य पहचान दस्तावेज जुटाते थे। इसके बाद फर्जी रिकॉर्ड और नकली मोहरों की मदद से बैंक खाते खुलवाए जाते थे। जांच एजेंसियों का दावा है कि इन खातों के जरिए डेबिट और क्रेडिट कार्ड जारी करवाए जाते थे और बाद में ऑनलाइन भुगतान प्लेटफॉर्मों तथा अन्य माध्यमों से वित्तीय लेन-देन किए जाते थे।
छापे में क्या-क्या मिला?
पुलिस की छापेमारी के दौरान बड़ी मात्रा में दस्तावेज और बैंकिंग सामग्री बरामद हुई। अधिकारियों के अनुसार बरामदगी में शामिल हैं:
- 180 आधार कार्ड
- 97 पैन कार्ड
- 139 वोटर आईडी कार्ड
- 92 डेबिट और क्रेडिट कार्ड
- 10 बैंक पासबुक
- 5 चेकबुक
- कई फर्जी मोहरें और सीलें
बरामद सामग्री को जांच के लिए जब्त कर लिया गया है और पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल किन-किन गतिविधियों में किया गया।
असम के साइबर फ्रॉड से जुड़ा कनेक्शन
जांच के दौरान एक और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। पुलिस को बरामद बैंक खातों में से एक का संबंध असम में दर्ज साइबर फ्रॉड की शिकायत से जुड़ा मिला है। इसके बाद जांच का दायरा केवल मेरठ तक सीमित नहीं रहा और विभिन्न राज्यों में संभावित नेटवर्क की जांच शुरू कर दी गई है।
क्या बड़ा साइबर नेटवर्क भी शामिल है?
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि मामला केवल फर्जी दस्तावेज तैयार करने तक सीमित नहीं हो सकता। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या आरोपियों के पीछे कोई बड़ा साइबर अपराध नेटवर्क काम कर रहा था, जो फर्जी बैंक खातों और पहचान दस्तावेजों का इस्तेमाल ऑनलाइन धोखाधड़ी के लिए करता था।
कई धाराओं में मामला दर्ज
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) और आधार अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। अधिकारियों का कहना है कि बरामद दस्तावेजों और डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच भी कराई जाएगी ताकि पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।
जांच जारी
फिलहाल दोनों आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस और साइबर सेल यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित फर्जीवाड़े से कितने लोगों की पहचान का दुरुपयोग किया गया और इससे कितने वित्तीय लेन-देन जुड़े हुए थे। जांच एजेंसियों का मानना है कि मामले में आगे और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।
