केरल में दीपक जलाने पर विवाद, मुस्लिम लीग की विधायक का मुस्लिम समुदाय कर रहा है बहिष्कार

0
IUML MLA FATIMA

केरल में एक उद्घाटन समारोह के दौरान पारंपरिक दीपक जलाने की घटना ने राजनीतिक और धार्मिक बहस को जन्म दे दिया है। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) की विधायक फातिमा तहिलिया द्वारा एक कार्यक्रम में पारंपरिक निलाविलक्कु (तेल का दीपक) जलाने के बाद कुछ मुस्लिम संगठनों की आपत्ति सामने आई है। इसके बाद यह मुद्दा केवल एक स्थानीय विवाद नहीं रहा, बल्कि धार्मिक पहचान, सांस्कृतिक परंपराओं और सेक्युलरिज्म को लेकर व्यापक चर्चा का विषय बन गया है।

क्या है पूरा मामला?

रिपोर्टों के अनुसार, IUML विधायक फातिमा तहिलिया ने एक रेस्टोरेंट के उद्घाटन कार्यक्रम में केरल की परंपरा के अनुसार निलाविलक्कु जलाया। केरल में सार्वजनिक कार्यक्रमों, सांस्कृतिक आयोजनों और उद्घाटन समारोहों में दीप प्रज्ज्वलन लंबे समय से एक सामान्य परंपरा रही है।

हालांकि इस घटना के बाद कुछ मुस्लिम संगठनों ने आपत्ति जताई। विशेष रूप से “सामस्था केरला जमीय्यतुल उलेमा” से जुड़े कुछ नेताओं ने कहा कि मुसलमानों को उन धार्मिक या सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग नहीं लेना चाहिए जिनका इस्लामी परंपराओं में कोई आधार नहीं है। इसी बयान के बाद विवाद और बढ़ गया।

पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे विवाद

केरल में यह पहला अवसर नहीं है जब सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं के बीच टकराव जैसी स्थिति बनी हो।

2025 में ओणम और क्रिसमस जैसे त्योहारों में मुस्लिम समुदाय की भागीदारी को लेकर भी बहस हुई थी। कुछ इस्लामिक प्रचारकों ने इन आयोजनों में भागीदारी को अनुचित बताया था। इसी प्रकार कुछ शैक्षणिक संस्थानों में होली, ओणम, क्रिसमस और इफ्तार जैसे आयोजनों को लेकर भी समय-समय पर विवाद सामने आते रहे हैं। मुख्य रूप से अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी आर जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में इफ़्तार मनाने की छूट है लेकिन वही होली मनाने पर विवाद खड़ा हो जाता है। लेकिन क्या दीपक जलाना मज़हब के ख़िलाफ़ है ? जब कोई हिंदू किसी मुस्लिम युवक के ईद के दिन गले लगाए तो वो सेक्युलरिज्म है और वही कोई मुस्लिम नेता हिंदू त्योहार में पहुँच जाएँ तो यह मज़हब के ख़िलाफ़ है। वैसे मीडिया रिपोर्ट्स में ये भी बात कहीं जा रही है कि फ़ातिमा को इस्लाम से निकालने की बात कहीं जा रही है। 

Leave a Reply

Discover more from Detail News India

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading