‘हर ब्रेकअप धोखा नहीं…’ आपसी सहमति से बने संबंधों को ‘खराब चरित्र’ का आधार नहीं मान सकते: सुप्रीम कोर्ट

0
ChatGPT Image Jun 9, 2026, 06_19_45 PM

नई दिल्ली: देश की शीर्ष अदालत (Supreme Court) ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता और प्राइवेसी को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि दो बालिग और आपसी सहमति वाले अविवाहित वयस्कों (Consenting Adults) के बीच का रिश्ता किसी के ‘खराब चरित्र’ (Bad Character) को दर्शाने का आधार नहीं हो सकता। कोर्ट ने कहा कि यदि कोई प्रेम संबंध विवाह के अंजाम तक नहीं पहुंच पाता है, तो इसका मतलब यह कतई नहीं है कि वह रिश्ता धोखेबाज़ी या आपराधिक इरादे पर आधारित था।

क्या है पूरा मामला?

यह पूरा विवाद तेलंगाना से जुड़े एक मामले से शुरू हुआ था। यहाँ एक युवक का चयन पुलिस कॉन्स्टेबल के पद पर हुआ था। हालांकि, पुलिस भर्ती बोर्ड ने उसकी नियुक्ति को सिर्फ इसलिए रद्द कर दिया क्योंकि अतीत में उसका एक महिला के साथ प्रेम प्रसंग (Affair) रहा था। रिश्ता टूटने के बाद महिला ने शिकायत दर्ज कराई थी, जिसे बाद में दोनों पक्षों ने आपसी समझ और समझौते से खत्म कर लिया था। इसके बावजूद भर्ती बोर्ड ने तर्क दिया कि युवक का अतीत विवादित है और उसका चरित्र पुलिस विभाग के लिए उपयुक्त नहीं है।

भर्ती बोर्ड को सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार

जब यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, तो पीठ ने भर्ती बोर्ड के इस फैसले पर गहरी आपत्ति जताई। अदालत ने दो टूक शब्दों में कहा कि देश का कानून दो वयस्कों को अपनी मर्जी से आपसी सहमति का रिश्ता बनाने से नहीं रोकता है। अदालत ने अपनी टिप्पणी में कहा:

“यह जरूरी नहीं है कि हर एक रिलेशनशिप शादी के मंडप तक पहुंचे ही। समाज के बदलते दौर में रिश्तों का बनना और टूटना एक सामान्य प्रक्रिया है। महज रिश्ता टूट जाने या शादी न हो पाने के आधार पर किसी एक पार्टनर को धोखेबाज मान लेना या उसे ‘बुरे चरित्र’ का सर्टिफिकेट दे देना पूरी तरह से गलत है।”

व्यक्तिगत नैतिकता के आधार पर नहीं छीन सकते रोजगार

सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि प्रशासनिक फैसलों या सरकारी नौकरियों में किसी उम्मीदवार की योग्यता का आकलन समाज की रूढ़िवादी सोच या व्यक्तिगत नैतिकता (Personal Morality) के चश्मे से नहीं किया जाना चाहिए। अदालत ने तेलंगाना पुलिस भर्ती बोर्ड के आदेश को खारिज करते हुए युवक को सेवा में बहाल करने का निर्देश दिया और साफ किया कि पर्सनल चॉइस और राइट टू प्राइवेसी हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है।

Leave a Reply

Discover more from Detail News India

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading