देहरादून के एक रेजिडेंशियल पॉश एरिया में था अवैध मस्जिद, ,मस्जिद पर धामी सरकार का चला डंडा
अवैध मस्जिद की तस्वीर, आभार - एबीपी न्यूज़
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के एक पॉश इलाके से कानून व्यवस्था और अवैध निर्माण को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है। यहाँ दो रिहायशी फ्लैटों को आपस में जोड़कर नियमों के विरुद्ध अवैध रूप से मदरसा और मस्जिद का संचालन किया जा रहा था। इस गंभीर उल्लंघन का संज्ञान लेते हुए मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) ने त्वरित कार्रवाई की है और पूरे परिसर को सील कर दिया है। इस मामले के सामने आने के बाद स्थानीय हिंदू संगठनों ने गहरा आक्रोश व्यक्त किया था, जिसके बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले की संजीदगी को देखते हुए MDDA को गहन जांच करने और तत्काल उचित विधिक कार्रवाई करने के कड़े निर्देश जारी किए थे।
आमतौर पर जब भी किसी अवैध रूप से संचालित मदरसे पर प्रशासनिक कार्रवाई होती है, तो एक विशेष वर्ग द्वारा इसे लक्षित ( TARGETED ) कार्रवाई बताकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया जाता है। इस मामले में भी ऐसा ही माहौल बनाने का प्रयास किया गया, लेकिन यदि सरकारी दस्तावेजों और तय प्रक्रियाओं के आधार पर बात की जाए, तो प्रशासन का यह कदम पूरी तरह कानून सम्मत है। MDDA ने अचानक या जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाया है, बल्कि पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए पूर्व में ही मस्जिद प्रबंधन को सीलिंग का नोटिस जारी कर दिया था, जिसके बाद सोमवार को प्रशासनिक टीम ने मौके पर पहुँचकर सीलिंग की इस कार्रवाई को अंजाम दिया। सोशल मीडिया एक्स पर मुस्लिम स्पेस नाम के एक अकाउंट्स ने इस कार्रवाई को लेकर यही नैरेटिव चलाया कि ये targeted attack है।
प्रशासनिक रिकॉर्ड के अनुसार, इस विवादित परिसर की पहली मंजिल को पिछले वर्ष ही सील कर दिया गया था। इसके पश्चात, इस परिसर का प्रबंधन देखने वाली इंतजामिया कमेटी ने अपनी बेगुनाही साबित करने और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए प्रशासन से अतिरिक्त समय की मांग की थी। प्रशासन ने मानवीय आधार पर कमेटी को पर्याप्त अवसर देते हुए स्वीकृत नक्शा, वक़्फ़ बोर्ड की अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC), मदरसे की आधिकारिक मान्यता और अन्य सभी आवश्यक दस्तावेज मुहैया कराने को कहा था। बार-बार समय दिए जाने और प्रशासनिक तकादे के बावजूद, प्रबंधन समिति तय समय सीमा के भीतर कोई भी वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने में पूरी तरह विफल रही।
विधिक नियमों के अनुसार, किसी भी रिहायशी या आवासीय भवन (Residential Building) को व्यावसायिक अथवा धार्मिक परिसर जैसे कि मस्जिद या मदरसे में परिवर्तित नहीं किया जा सकता है। इसके लिए कड़े भूमि उपयोग नियम और सुरक्षा मानक तय होते हैं, जिनका यहाँ स्पष्ट रूप से उल्लंघन पाया गया। अंततः, कानून की अवहेलना और वैध साक्ष्यों के अभाव में प्रशासन को यह कड़ा कदम उठाना पड़ा। वर्तमान में यह मामला पूरे प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या नियमों को ताक पर रखकर इस तरह के अवैध केंद्रों का संचालन जायज है।
