जब भी दुनिया में झुकी हुई इमारतों की बात होती है, सबसे पहले इटली की मशहूर लीनिंग टॉवर ऑफ पीसा का नाम सामने आता है। हर साल लाखों पर्यटक सिर्फ उसकी झुकी हुई बनावट को देखने के लिए इटली पहुंचते हैं। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि भारत के वाराणसी में भी एक ऐसा मंदिर मौजूद है, जो झुकाव के मामले में पीसा की मीनार को पीछे छोड़ देता है।
कहां स्थित है यह मंदिर?
वाराणसी के ऐतिहासिक मणिकर्णिका घाट के पास स्थित रत्नेश्वर महादेव मंदिर, जिसे स्थानीय लोग ‘काशी करवट’ भी कहते हैं, अपनी अनोखी बनावट के कारण दुनियाभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। यह मंदिर गंगा नदी के बिल्कुल किनारे बेहद निचले स्तर पर बना है, जिसके कारण हर साल बाढ़ के मौसम में इसका बड़ा हिस्सा पानी में डूब जाता है।
पीसा की मीनार से कितना ज्यादा झुका है?
रत्नेश्वर महादेव मंदिर का झुकाव लगभग 9 डिग्री तक माना जाता है। वहीं, इटली की प्रसिद्ध लीनिंग टॉवर ऑफ पीसा का वर्तमान झुकाव लगभग 4 डिग्री है। यानी झुकाव के मामले में वाराणसी का यह मंदिर पीसा की मीनार से कहीं अधिक झुका हुआ है।
हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि मंदिर की ऊंचाई पीसा की मीनार से कम है। इसकी प्रसिद्धि केवल अधिक झुकाव के कारण है।
आखिर मंदिर इतना झुका कैसे?
विशेषज्ञों के अनुसार, यह मंदिर शुरुआत से झुका हुआ नहीं था। माना जाता है कि गंगा किनारे की मुलायम मिट्टी, कमजोर नींव और वर्षों तक लगातार हुए जल कटाव के कारण इसकी जमीन धीरे-धीरे धंसती गई। इसी वजह से समय के साथ पूरा ढांचा एक ओर झुक गया। पुरानी तस्वीरों और ऐतिहासिक अभिलेखों से भी संकेत मिलता है कि मंदिर का झुकाव धीरे-धीरे बढ़ा, न कि एक साथ।
फिर भी आज तक गिरा क्यों नहीं?
यही इस मंदिर का सबसे बड़ा रहस्य माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि मंदिर को बड़े-बड़े पत्थरों की इंटरलॉकिंग तकनीक से बनाया गया है। इसमें प्रत्येक पत्थर दूसरे पत्थर को मजबूती से थामे रखता है, जिससे पूरे ढांचे का भार समान रूप से वितरित होता है। इसके अलावा, मंदिर की पारंपरिक निर्माण शैली और पत्थरों की सटीक फिटिंग इसे अतिरिक्त मजबूती प्रदान करती है। यही वजह है कि लगभग 9 डिग्री तक झुकने और वर्षों तक गंगा की लहरों का सामना करने के बावजूद यह आज भी खड़ा है।
कई महीनों तक पानी में डूबा रहता है मंदिर
रत्नेश्वर महादेव मंदिर की एक और अनोखी बात यह है कि मानसून और बाढ़ के दौरान इसका गर्भगृह कई महीनों तक गंगा के पानी में डूबा रहता है। कई बार पानी इतना बढ़ जाता है कि मंदिर का निचला हिस्सा पूरी तरह जलमग्न हो जाता है। इसके बावजूद इसकी संरचना को कोई बड़ा नुकसान नहीं पहुंचा है, जो इसकी मजबूत इंजीनियरिंग का उदाहरण माना जाता है।
मंदिर के निर्माण को लेकर क्या कहते हैं इतिहासकार?
रत्नेश्वर महादेव मंदिर के निर्माण को लेकर अलग-अलग मान्यताएं मौजूद हैं। कुछ लोककथाओं के अनुसार इसे राजा मानसिंह के एक सेवक ने अपनी माता की इच्छा पूरी करने के लिए बनवाया था। वहीं, कुछ इतिहासकार मानते हैं कि इसका निर्माण 19वीं सदी के आसपास हुआ। हालांकि, इसके निर्माण की सटीक ऐतिहासिक जानकारी आज भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
वैज्ञानिकों की क्या राय है?
विशेषज्ञों का मानना है कि मंदिर का झुकाव किसी चमत्कार का परिणाम नहीं, बल्कि भू-वैज्ञानिक परिस्थितियों का असर है। गंगा किनारे की जलयुक्त मिट्टी, नींव का धीरे-धीरे बैठना और लंबे समय तक होने वाला जल कटाव इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं। वहीं, इसकी मजबूती का श्रेय प्राचीन भारतीय पत्थर निर्माण तकनीक और संतुलित संरचनात्मक डिजाइन को दिया जाता है।
