सोनम वांगचुक का CJP नेताओं को कड़ा सबक: “जीत में विनम्रता होनी चाहिए, असंवेदनहीन जश्न नहीं!”
कहते हैं इतिहास खुद को दोहराता है। साल 2011 के अन्ना आंदोलन के बाद जब ‘आम आदमी पार्टी’ बनी, तो कई लोगों ने इसे आंदोलन की भावना के साथ धोखा माना था। कुछ ऐसा ही हाल अब 2026 में सोनम वांगचुक के साथ होता दिखाई दे रहा है। जिस शख्स ने जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन की नींव रखी और जिसके आह्वान पर भारी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे, आज उसी आंदोलन से निकले ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के नेता अपने मेंटॉर को किनारे कर जश्न में डूबे हैं। आंदोलन की सफलता के तुरंत बाद CJP नेताओं की एक फाइव-स्टार होटल में पार्टी करने की वीडियो सामने आने के बाद भारी विवाद खड़ा हो गया है। इस पर अब आंदोलन के प्रमुख चेहरे सोनम वांगचुक ने तीखी प्रतिक्रिया दी है, जिससे CJP के शीर्ष नेतृत्व में खलबली मच गई है।
महंगे होटल में जश्न और बॉलीवुड गानों पर डांस
दरअसल, सरकार द्वारा छात्रों की सभी मांगें स्वीकार किए जाने और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे (25 जुलाई) के अगले ही दिन, CJP के नेता एक महंगे होटल में पार्टी करते नजर आए। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में सौरभ दास और आशुतोष रांका कई CJP वॉलेंटियर्स के साथ बॉलीवुड गानों पर थिरकते और शराब-शबाब के जश्न में डूबे दिखाई दिए। छात्रों की असामयिक मौत और पेपर लीक जैसे बेहद गंभीर और संवेदनशील मुद्दों पर हुए आंदोलन के तुरंत बाद इस तरह के लग्जरी जश्न को लेकर आम जनता और छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा है।
मेदांता से सीधे राजघाट पहुंचे वांगचुक, नेताओं को दिखाई कांचा
एक तरफ जहाँ CJP नेता होटल में जश्न मना रहे थे, वहीं 26 दिनों के कठिन अनशन के बाद मेदांता अस्पताल से डिस्चार्ज हुए सोनम वांगचुक सीधे महात्मा गांधी की समाधि ‘राजघाट’ पहुंचे। राजघाट पर मीडिया से बात करते हुए जब उनसे CJP नेताओं की इस पार्टी के बारे में पूछा गया, तो वांगचुक ने गहरी निराशा जताते हुए कड़े शब्दों में कहा:
“जीत के साथ हमेशा विनम्रता होनी चाहिए। किसी भी सफलता का उत्सव गरिमा, संयम और जिम्मेदारी के साथ मनाया जाना चाहिए। जब तक पीड़ितों को पूरी तरह न्याय नहीं मिल जाता, तब तक इस तरह का असंवेदनशील जश्न उचित नहीं है।”
वांगचुक के इस बयान ने जनता के सामने CJP नेताओं की मंशा और उनके चरित्र को उजागर कर दिया है, जिससे पार्टी के भीतर तिलमिलाहट साफ देखी जा सकती है।
क्या दोहराया गया 2011 का इतिहास?
राजनीतिक विश्लेषकों और आम जनता का मानना है कि CJP के नेताओं ने सोनम वांगचुक के चेहरे और उनके 26 दिन लंबे अनशन का इस्तेमाल केवल अपनी राजनीतिक जमीन तैयार करने के लिए किया। 2011 में जब अन्ना हजारे ने अनशन किया था, तब भी देश को बदलाव की उम्मीद थी, लेकिन महत्वाकांक्षी लोगों ने उस आंदोलन की सीढ़ी चढ़कर अपनी सत्ता बना ली।
सोशल मीडिया पर फूटा छात्रों का गुस्सा
सोशल मीडिया पर लोग CJP के शीर्ष नेतृत्व से तीखे सवाल पूछ रहे हैं। यूजर्स का कहना है कि जिन छात्रों ने अपनी जान गँवाई और जिन पर अभी भी कानूनी मुकदमे चल रहे हैं, क्या यह जश्न उनके बलिदान का अपमान नहीं है? आंदोलन सिर्फ मांगें मनवाने का जरिया नहीं, बल्कि चरित्र का प्रमाण होता है।
