कर्नाटक: ‘मनहूस’ बंगले के खौफ में घिरे डीके शिवकुमार! सोशल मीडिया पर लोगों ने याद दिलाया योगी आदित्यनाथ का ‘नोएडा मॉडल’

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भारत में राजनीति और अंधविश्वास का नाता कोई नया नहीं है। देश भले ही डिजिटल इंडिया और स्पेस मिशन के दौर में सुपरपावर बनने की राह पर हो, लेकिन हमारे राजनेताओं का एक पैर आज भी दकियानूसी मान्यताओं में फंसा नजर आता है। कोई नेता किसी खास कुर्सी पर बैठने से कतराता है, कोई किसी शहर का रुख करने से घबराता है, तो कोई आलीशान सरकारी कोठरी को ही ‘मनहूस’ मानकर वहां जाने से इनकार कर देता है।

अंधविश्वास का ऐसा ही एक ताजा नजारा अब कांग्रेस शासित राज्य कर्नाटक में देखने को मिल रहा है, जहाँ मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार एक ऐसे कथित ‘वास्तु दोष’ और अंधविश्वास के चक्रव्यूह में फंसे नजर आ रहे हैं, जिसका उनके पास कोई तोड़ नहीं है।

160 साल पुरानी हेरिटेज बिल्डिंग में शिफ्ट होंगे सीएम

कर्नाटक के सियासी गलियारों से आई खबर के मुताबिक, मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने आधिकारिक सीएम हाउस ‘अनुग्रह’ में रहने से साफ मना कर दिया है। इसके बजाय उन्होंने बेंगलुरु के ‘कुमारकृपा’ में रहने की योजना बनाई है, जो कि एक 160 साल पुरानी हेरिटेज बिल्डिंग है।

तमाशा यह है कि इस पुरानी इमारत को मुख्यमंत्री अपने हिसाब से रिनोवेट (Renovate) करवा रहे हैं। कर्नाटक लोक निर्माण विभाग (PWD) के सूत्रों के मुताबिक: इस हेरिटेज बिल्डिंग में सुरक्षा और वास्तु के फेरबदल के तहत 6 फीट ऊंची बाउंड्री वॉल खड़ी की जा रही है। इन बदलावों को पूरा करने में कम से कम 3 महीने का समय लगेगा। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ‘कुमारकृपा’ में दशहरा के शुभ मौके पर ही गृह प्रवेश करेंगे।

आखिर क्या है ‘अनुग्रह’ बंगले का इतिहास?

‘अनुग्रह’ लंबे समय से कर्नाटक के मुख्यमंत्रियों का आधिकारिक सरकारी आवास रहा है। लेकिन सियासी गलियारों में यह चर्चा आम है कि जो भी मुख्यमंत्री इस बंगले में रहने गया, उसकी कुर्सी चली गई या फिर उसकी सरकार संकटों के भंवर में डूब गई। कई मुख्यमंत्रियों ने या तो यहाँ रहने से परहेज किया या फिर कुछ ही समय बाद इसे छोड़ दिया। राजनीतिक स्टाफ और नौकरशाहों के बीच यह बात एक स्थापित मान्यता बन चुकी है कि इस घर में कोई बड़ा ‘दोष’ है।

सोशल मीडिया पर उड़ा मजाक

जैसे ही डीके शिवकुमार के ‘अनुग्रह’ बंगले को ठुकराने की खबर सार्वजनिक हुई, सोशल मीडिया पर यूज़र्स ने उन्हें आड़े हाथों लेना शुरू कर दिया। लोग कांग्रेस की इस कथित ‘प्रगतिशील सोच’ पर तंज कस रहे हैं और शिवकुमार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सीखने की नसीहत दे रहे हैं। यूपी की राजनीति में भी दशकों से ऐसा ही एक खतरनाक ‘अंधविश्वास और शाप’ चला आ रहा था। माना जाता था कि जो भी सिटिंग सीएम चुनाव से ठीक पहले नोएडा (गौतमबुद्ध नगर) का दौरा करता है, वह चुनाव हार जाता है और उसकी सत्ता चली जाती है। मुलायम सिंह यादव और मायावती जैसे दिग्गजों की इतनी हिम्मत नहीं हुई कि वे इस अंधविश्वास को चुनौती दे सकें। लेकिन, साल 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस दकियानूसी मिथक को पैरों तले कुचल दिया। उन्होंने न सिर्फ नोएडा का दौरा किया, बल्कि वहां कई रैलियां कीं। योगी ने साफ संदेश दिया कि उन्हें किसी अंधविश्वास पर नहीं, बल्कि सूबे की जनता और अपने काम पर भरोसा है। नतीजा सबके सामने था—योगी आदित्यनाथ ने प्रचंड बहुमत के साथ यूपी की सत्ता में दोबारा ऐतिहासिक वापसी की।

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