UP Politics: “अतीक अहमद के कुत्ते सहलाते थे मुलायम सिंह…”, योगी के मंत्री सतीश शर्मा के बयान से यूपी की सियासत में भूचाल
Satish Sharma on Mulayam Singh Yadav: उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर माफिया और राजनेताओं के पुराने गठजोड़ को लेकर जुबानी जंग तेज हो गई है। योगी सरकार के कद्दावर मंत्री सतीश चंद्र शर्मा ने पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव और माफिया अतीक अहमद के रिश्तों को लेकर एक ऐसा सनसनीखेज दावा किया है, जिसने समाजवादी पार्टी (सपा) के खेमे में हड़कंप मचा दिया है। बाराबंकी में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान मंच से बोलते हुए मंत्री सतीश शर्मा ने सपा के शासनकाल की कानून-व्यवस्था पर तीखा हमला बोला।
बाराबंकी के मंच से मंत्री सतीश शर्मा का बड़ा दावा
दरअसल, बाराबंकी में एक जनसभा को संबोधित करते हुए यूपी सरकार के मंत्री सतीश चंद्र शर्मा ने पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव और अतीक अहमद के कथित संबंधों पर से पर्दा उठाने की कोशिश की। उन्होंने मंच से सीधे तौर पर दावा किया कि मुलायम सिंह यादव, माफिया अतीक अहमद के सामने इस कदर नतमस्तक थे कि वे उसके कुत्ते को भी सहलाने से गुरेज नहीं करते थे।
मंत्री सतीश चंद्र शर्मा ने मंच से कहा:
“मुलायम सिंह यादव अतीक अहमद के कुत्ते को सहलाने का काम करते थे”
‘सपा राज में अतीक का गुलाम था सिस्टम’
योगी के मंत्री ने अपने संबोधन में उस दौर की कड़वी सच्चाई को जनता के सामने रखते हुए कहा कि जब मुलायम सिंह की सरकार अतीक अहमद के प्रभाव में थी, तब प्रयागराज से लेकर पूरे पूर्वांचल में इस माफिया का आतंक बोलता था। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा के राज में पुलिस अधिकारी भी अतीक अहमद के सामने खड़े होने से कतराते थे। कानून की धज्जियां उड़ाना अतीक के लिए बाएं हाथ का खेल बन चुका था क्योंकि उसे पता था कि लखनऊ में बैठी सरकार उसके सारे गुनाहों पर पर्दा डाल देगी। जिस माफिया को जेल की सलाखों के पीछे होना चाहिए था, उसे सपा ने राजनीतिक संरक्षण देकर विधायक और सांसद तक बना दिया।
ट्विटर किंग आज खामोश क्यों हैं?
मंत्री सतीश शर्मा के इस बयान के बाद समाजवादी पार्टी के भीतर सियासी भूचाल आ गया है। आज लोकतंत्र और संविधान की बड़ी-बड़ी बातें करने वाले ‘ट्विटर किंग’ अखिलेश यादव खामोश हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सतीश शर्मा के इस बयान ने यूपी की राजनीति के उस पुराने जख्म को हरा कर दिया है जिसे समाजवादी पार्टी हमेशा छिपाने की कोशिश करती रही है। इस बयान के बाद से सोशल मीडिया से लेकर सियासी गलियारों तक चर्चाओं का बाजार गर्म है और इसने आगामी चुनावों से पहले सपा के दावों की हवा निकाल दी है।
