“अपनी हैदराबादी बैरिस्टरी का थोड़ा-बहुत ज्ञान अपने….” राजभर ने ओवैसी को दी नसीहत

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ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के उत्तर प्रदेश दौरे से पहले ही राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के अध्यक्ष और यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने ओवैसी को नसीहत देते हुए उनके सहयोगियों की भाषा और बयानबाजी पर सवाल उठाए हैं।

14 जून को बहराइच पहुंचेंगे ओवैसी

उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने अपनी राजनीतिक गतिविधियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में वह 14 जून को बहराइच में एक जनसभा को संबोधित करेंगे। कार्यक्रम से पहले उनके सैयद सालार मसूद गाजी की दरगाह पर जाने का भी कार्यक्रम है। हालांकि, उनके दौरे से पहले ही एक विवादित बयान को लेकर राजनीतिक बहस छिड़ गई है।

ओम प्रकाश राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए ओवैसी को संबोधित किया। उन्होंने लिखा कि ओवैसी अपने नेताओं को भी संयमित भाषा का इस्तेमाल करना सिखाएं। राजभर ने कहा कि बहराइच वही भूमि है जहां चक्रवर्ती सम्राट महाराजा सुहेलदेव राजभर ने विदेशी आक्रमणकारियों के खिलाफ संघर्ष कर भारत की अस्मिता और स्वाभिमान की रक्षा की थी। उन्होंने ओवैसी से कहा कि वह अपने सहयोगियों को इतिहास और स्थानीय भावनाओं का सम्मान करने की सीख दें।

“अहंकार और उग्रता सम्मान नहीं दिलाते”

अपने पोस्ट में राजभर ने आगे लिखा कि अनावश्यक उग्रता और अहंकार का प्रदर्शन कभी सम्मान नहीं दिलाता। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि महाराजा सुहेलदेव के नेतृत्व में इस भूमि के वीरों ने विदेशी आक्रमणकारियों के अभिमान को परास्त किया था।

राजभर ने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश की धरती अपने नायकों, अपने इतिहास और अपने स्वाभिमान का सम्मान करना जानती है।

क्या था AIMIM नेता का विवादित बयान?

यह पूरा विवाद AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली के एक बयान के बाद शुरू हुआ। शौकत अली ने कहा था: “मैं राजा सुहेलदेव को राजा मानता ही नहीं हूं। अगर वो राजा होते तो बहराइच में उनका कोई किला होता। जितने राजा थे उन्होंने अपने रहने और अपनी रानियों के लिए किले बनवाए। यहां ऐसा कुछ नहीं है। यह सब काल्पनिक है।”

शौकत अली के इस बयान पर राजभर ने कड़ी नाराजगी जताई और इसे महाराजा सुहेलदेव के सम्मान का अपमान बताया। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी जमीन मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे में इतिहास, धार्मिक स्थलों और क्षेत्रीय नायकों को लेकर होने वाली बयानबाजी राजनीतिक माहौल को और गरमा सकती है। ओवैसी के आगामी दौरे पर अब सभी की नजरें टिकी हुई हैं कि वह इस विवाद पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।

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