कर्नाटक में बड़ा सियासी उलटफेर! क्या पीएम मोदी का तंज सच साबित करने जा रही है कांग्रेस? सिद्धरमैया की विदाई और 4 डिप्टी सीएम का अनोखा फॉर्मूला

0
ChatGPT Image May 28, 2026, 11_44_10 AM

Karnataka Political Crisis: कर्नाटक की सियासत में इन दिनों भारी हलचल है। राज्य में सत्ता की मलाई और कुर्सी की लड़ाई अब एक नए मोड़ पर पहुंच चुकी है। विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत दर्ज करने के बाद से ही मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच छिड़ा सियासी घमासान अब खुलकर सामने आ गया है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि कांग्रेस आलाकमान अब आंतरिक कलह को शांत करने के लिए एक बेहद अनोखा और हैरान करने वाला फॉर्मूला तैयार कर रहा है, जिसे लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

पीएम मोदी का तंज बन रहा है सच !

दिलचस्प बात यह है कि करीब दो हफ्ते पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा था कि पार्टी इस उलझन में है कि ढाई-ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री बनाए जाएं या फिर 5 साल के लिए 5 मुख्यमंत्री नियुक्त कर दिए जाएं। प्रधानमंत्री का वह बयान भले ही एक राजनीतिक कटाक्ष था, लेकिन आज कर्नाटक की जमीनी हकीकत कुछ वैसी ही बनती दिख रही है। ढाई साल का कार्यकाल पूरा होते ही सिद्धरमैया डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंपने रहे हैं। यानी जिस बात का मज़ाक उड़ाया गया था, आज उसी ढाई-ढाई साल के फॉर्मूले पर कांग्रेस घुटने टेकती नजर आ रही है।

सत्ता का ‘बंदरबांट’: एक राज्य, चार-चार डिप्टी सीएम!

कर्नाटक में बगावत को रोकने और अपने ही नेताओं को खुश रखने के लिए कांग्रेस एक नया रिकॉर्ड बनाने की तैयारी में है। खबरों के अनुसार, राज्य में राजनीतिक संतुलन और जातिगत समीकरणों (दलित, ओबीसी, लिंगायत और अल्पसंख्यक) को साधने के लिए एक या दो नहीं, बल्कि पूरे चार उपमुख्यमंत्री बनाए जा सकते हैं।

इस संभावित रेस में कई नाम सामने आ रहे हैं। विशेष रूप से दलित कोटे से जी. परमेश्वर, प्रियांक खरगे और यतींद्र सिद्धारमैया के नामों की ज़ोर-शोर से चर्चा चल रही है। हालांकि, बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि क्या चार-चार डिप्टी सीएम बनाकर राज्य में स्थिरता लाई जा सकती है या यह सिर्फ बगावत की आग को दबाने का एक नाकाम पैंतरा है?

‘ब्रेकफास्ट डिप्लोमेसी’ और सियासी सरेंडर

इन तमाम अटकलों और भीतरी खींचतान के बीच, आज बेंगलुरु में एक बहुत बड़ी हलचल है। मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के सरकारी आवास ‘कावेरी’ में एक बेहद अहम ‘ब्रेकफास्ट मीटिंग’ हुई। इस नाश्ते की मेज़ पर मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार आमने-सामने बैठे। राजनैतिक हलकों में इसे सिर्फ एक साधारण बैठक नहीं, बल्कि ‘आर्ट ऑफ पॉलिटिकल सरेंडर’ कहा जा रहा है। शिवकुमार ने सिद्धरमैया के पैर छू कर साफ संदेश दे दिया कि, वो आशीर्वाद लेकर कर्नाटक की कमान संभालने जा रहे हैं।

इससे पहले दिसंबर 2025 में भी डीके शिवकुमार के आवास पर ऐसी ही एक ‘ब्रेकफास्ट डिप्लोमेसी’ देखने को मिली थी, जिसका मकसद जनता को यह संदेश देना था कि पार्टी में ‘ऑल इज वेल’ है। लेकिन राजनीति का सच ज्यादा दिनों तक छिप नहीं सका और दिसंबर 2025 का वह दिखावा आज मई 2026 में पूरी तरह बेनकाब हो चुका है।

जनता के सामने खड़े बड़े सवाल

कर्नाटक का यह पूरा घटनाक्रम भारतीय लोकतंत्र और राजनीति की प्राथमिकताओं पर कई तीखे सवाल खड़े करता है। क्या किसी भी राज्य की चुनी हुई सरकार सिर्फ आपसी गुटबाजी और कुर्सी की लड़ाई सुलझाने के लिए होती है? क्या कर्नाटक की जनता ने कांग्रेस को इसलिए वोट दिया था कि वह चार-चार डिप्टी सीएम बनाकर अपने नेताओं की नाराजगी दूर करे? फिलहाल, प्रधानमंत्री के तंज को सच साबित करती कर्नाटक की इस राजनीति ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

Leave a Reply

Discover more from Detail News India

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading