पासपोर्ट पर विदेश मंत्रालय के बयान से छिड़ी बहस, रोहिणी आचार्य ने सरकार से पूछे तीखे सवाल

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भारतीय पासपोर्ट को लेकर विदेश मंत्रालय के एक बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में नई बहस शुरू हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए नागरिकता से जुड़े दस्तावेजों की वैधता को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है।

दरअसल, 14वें पासपोर्ट सेवा दिवस के अवसर पर विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया कि भारतीय पासपोर्ट मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज (ट्रैवल डॉक्यूमेंट) है और इसे नागरिकता का अंतिम प्रमाण पत्र नहीं माना जा सकता। मंत्रालय के इस बयान के सामने आने के बाद विभिन्न राजनीतिक प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।

इसी क्रम में रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया के माध्यम से केंद्र सरकार से कई सवाल पूछे। उन्होंने कहा कि यदि पासपोर्ट, आधार कार्ड, वोटर आईडी, पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस जैसे दस्तावेज नागरिकता के वैध प्रमाण नहीं हैं, तो सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर ऐसा कौन सा दस्तावेज है जो भारतीय नागरिकता का आधिकारिक और मान्य प्रमाण माना जाता है।

रोहिणी आचार्य ने यह भी सवाल उठाया कि जब नागरिकों को विभिन्न सरकारी सेवाओं और योजनाओं के लिए इन दस्तावेजों को बनवाने और अपने पास रखने के लिए कहा जाता है, तब उनकी वास्तविक उपयोगिता क्या है। उन्होंने यह भी पूछा कि यदि ये दस्तावेज नागरिकता के प्रमाण नहीं हैं, तो इनके आवेदन फॉर्म में नागरिकता से जुड़ा कॉलम क्यों शामिल किया जाता है।

विदेश मंत्रालय के बयान और उस पर आई राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के बाद सोशल मीडिया पर भी इस विषय को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कई लोग नागरिकता के प्रमाण और पहचान संबंधी दस्तावेजों के बीच अंतर को समझने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि विपक्षी दल सरकार से इस मुद्दे पर और अधिक स्पष्टता की मांग कर रहे हैं।

फिलहाल, इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी जारी है और नागरिकता से जुड़े दस्तावेजों की कानूनी स्थिति को लेकर बहस आगे बढ़ती दिखाई दे रही है।

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